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सतपुली नगर पंचायत अध्यक्ष के अधिकार सीज, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर शासन सख्त

देहरादून, 26 अक्टूबर। पौड़ी गढ़वाल जिले की सतपुली नगर पंचायत के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर शासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही 23 अक्टूबर से उनके सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अगले आदेश तक रोक दिए गए हैं। शासन ने अध्यक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया है।

जांच में कई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

शासन के अनुसार, सतपुली निवासी रविन्द्र रावत और शशांक घिल्डियाल की संयुक्त शिकायत पर जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल से मामले की जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में प्रथमदृष्टया अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

जांच में आरोप है कि 3,71,852 रुपये की लागत से बनी टैक्सी पार्किंग को तकनीकी स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया के बिना ध्वस्त कर दिया गया। पार्किंग ठेके की दर 16 हजार रुपये से घटाकर 8,200 रुपये करने और महर्षि वाल्मीकि ट्रस्ट को शासनादेश के बिना 50 हजार रुपये जारी करने के आरोप भी हैं।

इसके अलावा कुंज नयार घाटी मेले में टेंट और साउंड संबंधी कार्यों को अलग-अलग बांटकर करीब 9.63 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता किए जाने का आरोप लगाया गया है।

दुकानों के आवंटन और भुगतान पर भी सवाल

जांच में दुकानों के नियम विरुद्ध आवंटन, वाहनों के किराये के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और निकाय के वाहन के लिए अध्यक्ष अथवा उनके स्वजन के पेट्रोल पंप को भुगतान किए जाने जैसे आरोप भी शामिल हैं। यश टेंट हाउस के साथ एक ही चेक संख्या से कई लेन-देन किए जाने की भी जांच की गई।

वहीं, आवारा पशुओं और बंदरों के नाम पर आवंटित 46,800 रुपये में से 38,400 रुपये का बिल-बाउचर के बिना स्वयं के खाते में आहरण करने तथा पुराना बकाया वसूल किए बिना पार्किंग का दोबारा आवंटन करने के आरोप लगाए गए हैं।

जवाब नहीं देने पर पद से हटाने की कार्रवाई संभव

शासन ने प्रथमदृष्टया इन मामलों को अधिप्राप्ति नियमावली 2017/2025, सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर)-157 और 26 नवंबर 2024 के शासनादेश के उल्लंघन से संबंधित माना है। नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48(2)(क) और (ख) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

राज्यपाल की स्वीकृति से जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को अध्यक्ष के अधिकारों का निर्वहन सुनिश्चित करने के लिए अधिकृत किया गया है। जिलाधिकारी इस कार्य के लिए डिप्टी कलेक्टर से अनिम्न श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी को नामित कर सकते हैं।

अध्यक्ष को 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देने, साक्ष्य प्रस्तुत करने और व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध करने का अवसर दिया गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर उन्हें पद से हटाने की विधिक कार्रवाई शुरू की जा सकती है। फिलहाल आरोपों पर अध्यक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है।

 

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