देहरादून।अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी पर उत्तराखंड कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने धामी सरकार से पूछा है कि क्या इस घटनाक्रम से अंकिता हत्याकांड से जुड़े सवालों की जांच प्रभावित होगी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
गरिमा मेहरा दसौनी के अनुसार, अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने 23 अक्टूबर को अदालत में नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए सहमति दी थी। इस मामले में 26 अक्टूबर को आगे की न्यायिक प्रक्रिया होनी थी, लेकिन उससे पहले 25 अक्टूबर को उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता ने घटनाक्रम के समय को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि उर्मिला सनावर के खिलाफ किसी अन्य मामले में शिकायत दर्ज हुई है, तो कानून के मुताबिक उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि उस मामले की कार्रवाई और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों की जांच एक-दूसरे को प्रभावित न करें।
गरिमा ने सरकार से पूछा कि क्या वह यह भरोसा दिलाएगी कि कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों की जांच स्वतंत्र रूप से जारी रहेगी और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं और प्रदेश की जनता इस मामले में सच्चाई सामने आने की प्रतीक्षा कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने का सवाल है। इसमें कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठे प्रश्नों का जवाब पारदर्शी जांच से मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत से सवाल समाप्त नहीं होते, बल्कि सच्चाई सामने आने और निष्पक्ष जांच से ही जनता का भरोसा कायम हो सकता है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने धामी सरकार से मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए।
