हल्द्वानी। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में ग्रासलैंड का विस्तार किया जाएगा, जिससे बाघों और अन्य वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी। ये घास के मैदान चीतल, सांभर जैसे शाकाहारी जीवों के लिए मुख्य भोजन स्रोत हैं और इन शाकाहारी जीवों के शिकार के रूप में बाघों का आहार भी इन्हीं मैदानों पर निर्भर करता है। अत: इन घास के मैदानों का संरक्षण न केवल बाघों के लिए, बल्कि पूरे वन्यजीव तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लैंटाना झाड़ियों का बढ़ता संकट:
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ग्रासलैंड में एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, जहां लैंटाना नामक झाड़ियां तेजी से फैल रही हैं। यह झाड़ियां मुख्य रूप से वन्यजीवों के लिए हानिकारक हैं क्योंकि:
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ये झाड़ियां न तो शाकाहारी जीवों द्वारा खाई जाती हैं और न ही पर्यावरण को कोई लाभ देती हैं।
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इनका फैलाव धीरे-धीरे अन्य घास की प्रजातियों को नष्ट कर रहा है, जिससे शाकाहारी जीवों के लिए भोजन की कमी हो रही है, और इससे बाघों के लिए शिकार की उपलब्धता घट रही है।
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लैंटाना झाड़ियां घास के मैदानों में बढ़ते दबाव के कारण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रही हैं।
इस संकट को लेकर कॉर्बेट प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई है।
लैंटाना उन्मूलन योजना:
कॉर्बेट प्रशासन ने लैंटाना झाड़ियों का उन्मूलन करने के लिए एक विशेष योजना बनाई है। इस योजना के तहत:
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लैंटाना झाड़ियों को काटकर नष्ट किया जाएगा, ताकि घास के मैदानों को फिर से हरा-भरा किया जा सके।
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यह प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरे रिजर्व में लागू की जाएगी, जिससे पहले से प्रभावित क्षेत्रों में शिकार की उपलब्धता बढ़ सके।
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लैंटाना के उन्मूलन से वनस्पति की अन्य प्रजातियाँ फिर से पनप सकेंगी, जिससे वन्यजीवों के लिए भोजन और आश्रय मिल सकेगा।
कॉर्बेट रिजर्व का पारिस्थितिकी तंत्र:
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का पारिस्थितिकी तंत्र पूरे उत्तर भारत का एक प्रमुख उदाहरण है, जहां घास के मैदान विभिन्न शाकाहारी जीवों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये मैदान न केवल वन्यजीवों के जीवन के लिए आवश्यक हैं, बल्कि:
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बाघों और अन्य मांसाहारी जीवों के शिकार क्षेत्रों के रूप में कार्य करते हैं।
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ये क्षेत्र जंगली वनस्पतियों और पौधों की प्रजातियों का घर हैं, जो वन्यजीवों के लिए जैविक विविधता का आधार बनते हैं।
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घास के मैदानों का संरक्षण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए अत्यंत जरूरी है।
कॉर्बेट प्रशासन का बयान:
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा, “ग्रासलैंड का विस्तार और उन्मूलन का कार्य बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम लैंटाना झाड़ियों के उन्मूलन के बाद इन मैदानों को फिर से जीवनदान देंगे। इससे बाघों के लिए शिकार की अधिकता होगी और वन्यजीवों का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।”
उन्होंने आगे कहा, “यह कदम बाघों के संरक्षण की दिशा में एक अहम पहल है। कॉर्बेट प्रशासन पूरी तरह से इस काम को करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र को न केवल बचाया जा सके, बल्कि इसे और भी समृद्ध किया जा सके।”
लैंटाना उन्मूलन तकनीकी विधियाँ:
लैंटाना उन्मूलन के लिए विभिन्न तकनीकी विधियाँ अपनाई जाएंगी, जिनमें:
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मैकेनिकल और मैन्युअल तरीके: लैंटाना झाड़ियों को हाथ से काटना, बुलडोज़र की मदद से ज़मीन से उखाड़ना और फिर इन झाड़ियों को नष्ट करना।
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आग से नियंत्रण: कुछ क्षेत्रों में लैंटाना के विकास को रोकने के लिए नियंत्रित जलती हुई आग का प्रयोग।
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गर्म मौसम में जल प्रबंधन: नदी और जलाशयों के निकट लैंटाना झाड़ियों को हटाने के लिए विशेष जल प्रबंधन तकनीकों का इस्तेमाल।
इन विधियों के माध्यम से लैंटाना का फैलाव धीरे-धीरे नियंत्रित किया जाएगा, और प्राकृतिक घासों की पुनः वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
कॉर्बेट रिजर्व के भविष्य की दिशा:
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के इस कदम से न केवल बाघों का संरक्षण होगा, बल्कि यह कदम पूरे उत्तर भारत में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है। इस प्रकार के कदम वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की समर्पण और जागरूकता को दर्शाते हैं। बाघों के संरक्षण के साथ-साथ अन्य वन्यजीवों, पक्षियों, और वनस्पतियों की विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।
यह कदम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को एक स्थिर और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा और इसे आगामी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सकेगा।