रणबीर सिंह रावत ने योग को बनाया जीवन का हिस्सा, दूसरों को भी दिखा रहे स्वस्थ जीवन की राह

पौड़ी गढ़वाल: जहां एक ओर बढ़ती उम्र के साथ लोग शारीरिक समस्याओं का सामना कर रहे होते हैं, वहीं 81 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक रणबीर सिंह रावत योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में युवाओं को भी मात दे रहे हैं। उन्होंने न केवल योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है, बल्कि वे वर्षों से लोगों को योग के लाभ के बारे में जागरूक कर एक स्वस्थ समाज की दिशा में काम कर रहे हैं।

रणबीर सिंह रावत, जो पौड़ी जिले के एकेश्वर विकासखंड के श्रीकोटखाल गांव के निवासी हैं, का जीवन अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने 2005 में हेडमास्टर के पद से सेवानिवृत्ति ली और इसके बाद अपना जीवन योग और समाज सेवा को समर्पित कर दिया। अब वे गांव-गांव जाकर योग शिविर आयोजित करते हैं और बच्चों, युवाओं तथा बुजुर्गों को योगाभ्यास कराते हैं। उनका कहना है कि योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि यह एक जीवनशैली है, जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ हमें आध्यात्मिक संतुलन भी प्रदान करता है।

रणबीर सिंह रावत के अनुसार, “योग से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। लोगों को दवाओं के बजाय योग का अभ्यास करना चाहिए, क्योंकि यह बीमारियों से बचाव और इलाज दोनों में सहायक है।” वे प्रतिदिन 10 किलोमीटर दौड़ भी लगाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और समर्पण का प्रतीक है।

स्वस्थ जीवन का संदेश

रणबीर सिंह रावत का जीवन यह प्रमाण है कि उम्र केवल एक संख्या है, अगर संकल्प और समर्पण हो तो कोई भी व्यक्ति स्वस्थ और सक्रिय रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उनका जीवन अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गया है, जो उम्र या स्वास्थ्य के कारण योग से दूर रहते हैं। उनके प्रयासों से पौड़ी जनपद के अलावा अन्य जनपदों से भी योग के लिए निमंत्रण आ रहे हैं।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी शैलेंद्र पांडेय ने कहा, “हमारे विभाग द्वारा ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है जो योग और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने में योगदान दे रहे हैं। रणबीर सिंह रावत जैसे लोग समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में उम्र कोई बाधा नहीं है।”

निष्कर्ष

रणबीर सिंह रावत का जीवन यह सिखाता है कि अगर हमारी दिनचर्या और संयम सही हो, तो हम किसी भी उम्र में स्वस्थ और सक्रिय रह सकते हैं। उनके कार्य समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं।

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