रुद्रप्रयाग: केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज के ऊपरी क्षेत्रों में हाल ही में हिम तेंदुआ की गतिविधियां ट्रैप कैमरों में कैद हुई हैं। हिमखंडों से घिरे इस क्षेत्र में यह दुर्लभ वन्य जीव विचरण करता हुआ पाया गया। इसके अलावा, पीले गले वाला नेवला, लाल लोमड़ी, और अन्य दुर्लभ पक्षी प्रजातियां भी यहां देखी गई हैं।
इस क्षेत्र का डीएफओ तरुण एस के मार्गदर्शन में गहन निगरानी की जा रही है, जिसमें कैमरों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हिम तेंदुआ की उपस्थिति लंबे समय बाद दर्ज की गई है, और यह खुशी की बात है कि इस हिमालयी क्षेत्र में ऐसे अद्भुत जीव अपने प्राकृतिक परिवेश में विचरण कर रहे हैं।
विविध वन्य जीवन की उपस्थिति
केदारनाथ के ऊखीमठ रेंज में हिम तेंदुए के अलावा अन्य दुर्लभ वन्य जीवों की उपस्थिति भी देखने को मिली है। इस क्षेत्र में कस्तूरी मृग, भूरा भालू, भौंकने वाले हिरण, और लाल लोमड़ी की संख्या भी बढ़ रही है। इसके साथ ही, पक्षी प्रजातियों की भी विविधता देखी जा रही है, जिसमें मोनाल, तीतर और अन्य उच्च हिमालयी पक्षी शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, गुलदार, हिमालयन थार, भालू, और घुरल जैसे अन्य प्रमुख वन्य जीव भी इस क्षेत्र में पाए गए हैं। इस क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र प्राकृतिक रूप से समृद्ध है और इन जीवों के संरक्षण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।
संरक्षण और निगरानी में वृद्धि
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग का कुल क्षेत्रफल करीब 975.20 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें केदारनाथ, द्वितीय केदार तुंगनाथ और तृतीय केदार तुंगनाथ जैसे रमणीक स्थल भी स्थित हैं। यहां पर वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए नियमित गश्त की जाती है। विभाग ने इस पूरे क्षेत्र में 200 ट्रैप कैमरे लगाए हैं, जिनकी मदद से वन्य जीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
तरुण एस, डीएफओ ने बताया कि जुलाई के दूसरे सप्ताह तक सभी ट्रैप कैमरों का निरीक्षण कार्य पूरा हो जाएगा, जिससे वन्य जीवों और पक्षी प्रजातियों की सही संख्या और उनके विचरण का विस्तृत आंकड़ा प्राप्त किया जा सकेगा। इस कदम से प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।
निष्कर्ष
केदारनाथ में हिम तेंदुआ की उपस्थिति प्रकृति के लिए एक शुभ संकेत है। यह ना केवल पर्यावरणीय स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि इस क्षेत्र के जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों को भी बल देता है। वन्य जीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से इस क्षेत्र में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हो रही है।