ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहराने लगा है। तेल और पेट्रोल की कीमतों में तेज़ उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ और बढ़ने की आशंका है।
ईरान और इज़राइल के बीच जारी तनावपूर्ण हालात ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। मंगलवार को अमेरिकी कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 2.9% की भारी बढ़ोतरी देखी गई और यह अब 73.90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है। यह दर जनवरी 2025 के अंत के बाद से सबसे ऊंची है।
गौरतलब है कि सोमवार को तेल कीमतों में 1.7% की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन मंगलवार को भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाज़ार में फिर से उथल-पुथल मच गई। बीते सप्ताह इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए अभूतपूर्व हवाई हमलों के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 13% की उछाल आई है, जो अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे बड़ा साप्ताहिक उछाल है।
इस तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिका में रेगुलर गैसोलिन का औसत मूल्य तीन सेंट बढ़कर 3.17 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में ईंधन और परिवहन लागत में और वृद्धि हो सकती है।
ऊर्जा बाजार में इस उथल-पुथल से न केवल अमेरिका, बल्कि भारत सहित अन्य आयातक देशों पर भी असर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों की वृद्धि घरेलू मुद्रास्फीति और आम आदमी की जेब दोनों पर असर डाल सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान-इज़राइल संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।