चकला और चकलाघर

सुशील उपाध्याय

साल 2021 की बात है। तब एक इंटरव्यू में अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्लाह मोहिब ने अपने एक भाषण में पाकिस्तान को ‘चकलाघर’ कहा। सामान्य तौर पर एक खास दायरे में प्रयोग किए जाने वाला यह शब्द तुरंत ही चर्चा में आ गया। तुर्की भाषा का ये शब्द हिंदी में वेश्याओं के इलाके के लिए प्रयोग किया जाता है। लगभग रंडीखाने के पर्याय के तौर पर।

सामान्य बातचीत में इसे किसी खराब जगह या इलाके के लिए गाली के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसका संधि विच्छेद करें तो इसमें ‘चकला’ और ‘घर’, दो शब्द हैं। हिंदी और उसकी उपभाषाओं, बोलियों और सहोदरी भाषाओं में इसे भिन्न-भिन्न अर्थाें में प्रयुक्त किया जहाता है।
हिंदी में रोटी बनाने के गोल आकार के पत्थर, लकड़ी, लोहे के पट्टे या छोटी चैकी को भी चकला कहते हैं। (चकला-बेलन, जिस पर रोटी बनाते है वो चकला और जिससे बेलते हैं वो बेलन) चूंकि, इसका आकार गोल होता है इसलिए इस शब्द का कोई न कोई रिश्ता चाक और चक्र से भी है।

दाल आदि दलने की छोटी चक्की (चाकी) के एक पाट को भी चकला कहते हैं और यह भी गोल होता है। इसका प्रयोग कौरवी और हरियाणवी बोलियों में खूब मिलता है।इसके अलावा चकला किसी बड़े समतल इलाके के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। पहले चकलादार नाम का एक अधिकारी भी हुआ करता था।
वैसे चक शब्द खेत के लिए भी प्रयोग किया जाता है। देश के कई हिस्सों में चकबंदी अधिकारी का पद भी होता है। फैली हुई और गोलाकार-चौड़ी जमीन के लिए चकरार शब्द का प्रयोग भी देखने-सुनने को मिल जाता है।

चक्र जो कि तत्सम शब्द से चक्कर अथवा चक बना। चक तद्भव शब्द है। लेकिन, खेती की जमीन के संबंध में अब चक का गोलाकार या चक्राकार होना आवश्यक नहीं है। एक जगह स्थित किसी भी आकृति की खेती की जमीन को चक कहा जाता है।

कुमाऊँ में कई जगह चकल शब्द का उपयोग चौड़े (आकार) के लिए किया जाता है। चकल शब्द का उपयोग गोल-मटोल व्यक्ति के लिए भी उपयोग होता है। हिंदी में भी चौड़ा-चकला पुरुषेय उपमा है। लेकिन, चौड़ा-चकला गरिमापूर्ण शब्द नहीं है। अवधी में कई जगहों पर ‘चौड़े’ के लिए ‘चाकल’ शब्द का प्रयोग होता है।

तमिलनाड़ू में में जलेबी जैसे आकार की चावल के आटे की नमकीन डिश ‘चकली’ भी मिलती है। यहां चकली का रिश्ता भी गोलाई से ही है। ठीक उसी प्रकार जैसे कि चकरी या चक्री का है। दीपावली के दिनों में चकरी नाम का एक पटाखा भी खूब बिकता है जो जमीन पर गोल-गोल घूम कर रोशनी बिखेरता है।हरिद्वार (ज्वालापुर) में एक मोहल्ले का नाम ही चाकलान है।

या तो मुहल्ले की गोल आकृति के कारण ऐसा है या फिर लोगों की घुमंतू प्रवृत्ति के कारण क्योंकि इस इलाके में काफी संख्या में पंडे-पुरोहित भी रहते हैं जो कि वर्ष के एक बड़े भाग में अपने जजमानों के यहां देशभर में घूमते रहते हैं। लेकिन, इस मुहल्ले का चकलाघर शब्द से कोई रिश्ता जोड़ना उचित नहीं है।
चक(चक्र) का एक अर्थ घूमना भी होता है। इसी से चक उठा लेना भी बना है। भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण को चक्रधर या चक्रधारी भी कहा गया है।‘चक‘ शब्द में ‘ला‘ प्रत्यय जोड़कर शब्द बनाया गया-चकला।

इसका एक अर्थ, घूमती हुई चीज को उठा लेना भी हुआ। चूकि चक की प्रवृत्ति घूमना है इसलिए चकलाघर में रहने वाली स्त्री को अस्थिर या चलायमान माना गया। अर्थात जो किसी एक के प्रति निष्ठावान नहीं है। वह उसी के साथ चल देगी या रहने को तैयार हो जाएगी, जो उसकी कीमत चुकाएगा। इसी को ध्यान में रखकर एनएसए मोहिब ने पाकिस्तान को चकलाघर बता दिया।

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