अलमारी में धूल खाते सैकड़ों मूल विलेख, ऋषिकेश सब रजिस्ट्रार कार्यालय में हड़कंप

देहरादून।
जिलाधिकारी सविन बंसल के औचक निरीक्षण ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश में चल रही गंभीर अनियमितताओं की परतें खोल दीं। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि बिना सब-रजिस्ट्रार की मौजूदगी के अवैधानिक रूप से लिपिक द्वारा विलेखों का निबंधन किया जा रहा था, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने पाया कि कई महीनों से आवेदकों के मूल अभिलेख वापस नहीं किए गए थे, जबकि नियमानुसार तीन दिन के भीतर दस्तावेज लौटाना अनिवार्य है। सैकड़ों मूल विलेख कार्यालय की अलमारियों में धूल खाते मिले, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। डीएम ने लंबित मूल अभिलेखों को तत्काल जब्त कर तहसील प्रशासन के सुपुर्द कराया।

जिलाधिकारी ने यह भी पाया कि औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंडों के छोटे-छोटे टुकड़े कर कई रजिस्ट्रियां की गईं, जिससे करोड़ों रुपये की स्टांप शुल्क चोरी की आशंका जताई जा रही है। इस पूरे मामले में विस्तृत आख्या तलब की गई है।

निरीक्षण के दौरान कार्यालय में एक “घोस्ट कार्मिक” भी मिला, जिसका न तो कोई नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका में नाम दर्ज था। इस पर डीएम ने सभी कार्मिकों का रिकॉर्ड तत्काल तलब कर लिया। इसके अलावा, रजिस्ट्री नकल जारी करने में भी भारी लापरवाही सामने आई। जहां 24 घंटे में नकल देना नियमानुसार है, वहीं कई प्रकरण महीनों और वर्षों से लंबित पाए गए।

जिलाधिकारी ने यह भी पाया कि कार्यालय समय पर खुलने के बावजूद पहली रजिस्ट्री दो घंटे से अधिक देरी से की गई। शुल्क भुगतान के लिए पृथक व्यवस्था न होना और सभी भुगतान एक ही काउंटर पर लिया जाना भी गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटि के रूप में सामने आया।

डीएम सविन बंसल ने सभी अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर बताते हुए स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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