देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखंड में आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में सचिव आवास, राज्य संपत्ति एवं आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण के आयुक्त एवं मुख्य प्रशासक डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक की शुरुआत में कार्यक्रम प्रबंधक द्वारा उत्तराखंड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण की स्थापना, संगठनात्मक ढांचे, विधिक प्रावधानों, विशेष नीतियों और नियम-विनियमों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के गठन, वर्ष 1973 के अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित कार्यों तथा विभिन्न अवस्थापना विकास परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी साझा की गई।
समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 एवं 2.0 की प्रगति पर विशेष फोकस रहा। सचिव आवास ने निर्माण, स्वीकृति और आवंटन की स्थिति की विस्तार से समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य के लिए एक नई आवास नीति तैयार किया जाना समय की आवश्यकता है, क्योंकि वर्ष 2017 में जारी उत्तराखंड आवास नीति की वैधता समाप्त हो चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि नई नीति में शहरीकरण की वर्तमान चुनौतियों, किफायती आवास, पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और सतत विकास के सिद्धांतों को प्रमुखता से शामिल किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 की समीक्षा के दौरान देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) की परियोजनाओं में लॉटिंग और आवंटन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने तथा HRDA की लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एनपीएमसी के अंतर्गत पीएम आवास योजना (शहरी) 1.0 से जुड़े सभी कार्यों को सितंबर 2026 तक पूर्ण करने पर जोर दिया गया। साथ ही 15 दिनों के भीतर आवंटन सहित सभी प्रक्रियाओं के लिए औपचारिक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
इसके अलावा बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार ड्राफ्ट RFP पर चर्चा हुई। सचिव आवास ने इसे चारधाम क्षेत्रों, प्रमुख नगरों और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए पर्यावरणीय संतुलन के साथ विकास सुनिश्चित करने पर बल दिया।