नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम **‘मन की बात’** के 130वें एपिसोड में भारत की पारिवारिक व्यवस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामूहिक चेतना की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था आज भी दुनिया के कई देशों के लिए जिज्ञासा और प्रेरणा का विषय बनी हुई है। परिवार और समाज का सहयोग ही हमें बड़ी से बड़ी चुनौतियों से पार पाने की शक्ति देता है।
प्रधानमंत्री ने यूएई का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां वर्ष 2026 को **‘परिवार का वर्ष’** घोषित किया गया है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत यात्रा के दौरान इस पहल की जानकारी दी थी, जिसका उद्देश्य सामाजिक सौहार्द और सामूहिक भावना को मजबूत करना है।
उन्होंने गुजरात के बेचराजी क्षेत्र के **चंदनकी गांव** की सामुदायिक रसोई परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण है। गांव में वर्षों से एक साथ भोजन बनाने और खाने की परंपरा चली आ रही है। बीमार लोगों के लिए घर तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाती है।
सामाजिक जागरूकता का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के **अनंतनाग जिले** के शेखगुंड गांव में चलाए गए नशा मुक्ति अभियान की सराहना की, जहां स्थानीय प्रयासों से तंबाकू और नशे से जुड़ी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगी।
कार्यक्रम में **‘भजन क्लबिंग’** जैसे नए सांस्कृतिक प्रयोग का भी उल्लेख किया गया, जो युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भक्ति और आधुनिकता का सुंदर संगम है, जहां भजनों की पवित्रता को बनाए रखते हुए युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
उन्होंने विदेशों में भारतीय संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों की भी सराहना की, विशेष रूप से मलेशिया में भारतीय समुदाय द्वारा किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने सर्दियों में **श्रीअन्न (मिलेट्स)** के सेवन की अपील करते हुए इसे स्वास्थ्य और किसानों की आय दोनों के लिए लाभकारी बताया। इसके साथ ही उन्होंने **तमसा नदी पुनरुद्धार** और आंध्र प्रदेश की **जल संरक्षण परियोजनाओं** को जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए सामूहिक उत्सव मनाने का सुझाव दिया। अंत में उन्होंने आगामी **इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट**, स्टार्टअप इंडिया की 10 वर्षीय यात्रा और **‘क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी’** के मंत्र पर विशेष जोर दिया।