कार के हॉर्न जितनी तेज़ आवाज! खुदाई में मिली पाषाण युग की अद्भुत तकनीक

मैड्रिड। स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र में हुई एक पुरातात्विक खुदाई ने प्राचीन मानव सभ्यता की तकनीकी समझ को लेकर वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। खुदाई के दौरान करीब 6000 साल पुराने विशाल समुद्री शंख मिले हैं, जिनका उपयोग उस दौर में लंबी दूरी तक संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि पाषाण युग के कृषि समुदाय न केवल संगठित थे, बल्कि उनके पास प्रभावी संचार प्रणाली भी मौजूद थी।

पुरातत्वविदों के अनुसार, ये शंख साधारण सजावटी वस्तुएं नहीं थे। ‘कैरोनिया लैम्पस’ नामक बड़े समुद्री घोंघों के शंखों से बनाए गए ये हॉर्न इतने शक्तिशाली थे कि इनसे निकलने वाली आवाज पूरी घाटी में गूंज सकती थी। वैज्ञानिकों ने जब इन शंखों को दोबारा बजाकर उनकी ध्वनि क्षमता का परीक्षण किया, तो परिणाम चौंकाने वाले निकले। सबसे अच्छी स्थिति में मिले एक शंख से 111.5 डेसीबल तक की आवाज दर्ज की गई, जो लगभग एक कार के हॉर्न के बराबर मानी जाती है। खुले और पहाड़ी इलाकों में ऐसी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती थी।

अब तक पांच अलग-अलग पुरातात्विक स्थलों से कुल 12 शंख मिले हैं, जिनमें से आठ आज भी पूरी तरह काम कर रहे हैं। ये शंख खेतों, गुफाओं और जमीन के नीचे बनी गहरी खानों में पाए गए हैं, जो लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए थे। इससे संकेत मिलता है कि यह किसी एक स्थान तक सीमित परंपरा नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र में अपनाई गई एक साझा और सुव्यवस्थित संचार प्रणाली थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी और गुफाओं वाले इलाकों में, जहां दूर तक देख पाना कठिन होता था, वहां ये शंख संदेश पहुंचाने का सबसे भरोसेमंद साधन रहे होंगे। गहरी खानों में इनकी गूंज का उपयोग सुरक्षा संकेत, चेतावनी या श्रमिकों के बीच संवाद के लिए किया जाता रहा होगा।

शोध में यह भी सामने आया है कि प्राचीन कारीगरों ने इन शंखों को बेहद सोच-समझकर तैयार किया था। शंख के ऊपरी हिस्से को काटकर लगभग 20 मिलीमीटर चौड़ा माउथपीस बनाया गया था, जिससे आवाज नियंत्रित और स्थिर रहती थी। कुछ शंखों में छोटे छेद भी पाए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि इन्हें डोरी से लटकाकर या साथ ले जाकर इस्तेमाल किया जाता था।

दिलचस्प बात यह है कि ये शंख केवल एक ही तरह की आवाज नहीं निकालते थे। कुछ शंखों से तीन अलग-अलग सुर निकाले जा सकते थे, जो संगीत की दृष्टि से सटीक थे। एक पेशेवर ट्रम्पेट वादक की मदद से किए गए परीक्षणों ने यह साबित कर दिया कि पाषाण युग के लोग केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं थे, बल्कि व्यावहारिक जरूरतों के लिए भी उन्नत तकनीक का उपयोग करते थे।

हालांकि इस खोज के साथ एक रहस्य भी जुड़ा है। ईसा पूर्व 3600 के आसपास इस संचार तकनीक का उपयोग अचानक बंद हो गया। कांस्य युग के बाद के पुरातात्विक स्तरों में इन शंखों के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, जिससे वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि इतनी प्रभावी तकनीक आखिर क्यों लुप्त हो गई।

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