दिल्ली में बुद्ध की विरासत का वैश्विक संगम: पिपरावा अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी क्यों है खास?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी भारत की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक गौरव और वैश्विक उत्तरदायित्व को दर्शाने वाली एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।

इस विशेष प्रदर्शनी का शीर्षक *“प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष”* रखा गया है। इसमें उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरावा गांव से प्राप्त भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष, अस्थि-कलश और रत्न अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है। ये वही अवशेष हैं, जिन्हें 127 वर्षों बाद जुलाई 2025 में संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से स्वदेश वापस लाया गया था।

प्रदर्शनी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान काल तक की 80 से अधिक महत्वपूर्ण कलाकृतियां शामिल हैं। इनमें बुद्ध की मूर्तियां, प्राचीन पांडुलिपियां, थांगका चित्रकला और अनुष्ठानिक वस्तुएं प्रमुख हैं। ये कलाकृतियां न केवल बौद्ध दर्शन और परंपरा को दर्शाती हैं, बल्कि भारत की उस आध्यात्मिक चेतना को भी उजागर करती हैं, जिसने पूरी दुनिया को अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश दिया।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न देशों के राजदूत और राजनयिक कोर के सदस्य, पूजनीय बौद्ध भिक्षु, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विद्वान, विरासत विशेषज्ञ, कला जगत से जुड़े प्रतिष्ठित लोग, कला प्रेमी, बौद्ध अनुयायी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान भारत की प्राचीन विरासत के संरक्षण और उसके वैश्विक महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक 642 प्राचीन और ऐतिहासिक वस्तुएं विदेशों से भारत वापस लाई जा चुकी हैं। यह उपलब्धि सरकार की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी न केवल भारत की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती है, बल्कि भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश को आज की पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है।

 

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