गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने एक सनसनीखेज बयान में कहा है कि 1971 से पहले असम में बसे बंगाली हिंदू समुदाय को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम समझौते के तहत ये लोग पहले से ही भारतीय नागरिक माने जाते हैं।
यहां एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में CM शर्मा ने कहा, “हिंदू बंगालियों को लगता है कि वे पहले से ही भारतीय हैं और उनके पास इसके दस्तावेज हैं। कई परिवारों ने CAA के तहत आवेदन करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे अपनी नागरिकता कानूनी रूप से साबित करने को तैयार हैं।”
केवल 12 आवेदन, 3 को मिली नागरिकता
मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि CAA के तहत असम में अब तक केवल 12 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से तीन लोगों को नागरिकता प्रदान की जा चुकी है और नौ आवेदन विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा, “लाखों विदेशियों को नागरिकता मिलने की आशंकाओं के बावजूद, केवल 12 आवेदनों से साफ है कि CAA का असम में ज्यादा प्रभाव नहीं है।”
हिंदू बंगालियों का रुख
CM के मुताबिक हिंदू बंगाली समुदाय अपनी नागरिकता को लेकर आश्वस्त है और उनके पास मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “1971 से पहले आए बंगाली हिंदू भारतीय हैं, और उन्हें किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत नहीं।”
विपक्ष पर निशाना
सरमा ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि CAA को लेकर अनावश्यक भय फैलाया गया, लेकिन हकीकत में इसका असम पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा है।