नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर एक अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। लगभग दस महीने बाद आमने-सामने हुई इस वार्ता को भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष कज़ान में हुई बातचीत ने दोनों देशों के रिश्तों को सकारात्मक दिशा दी थी। उन्होंने विशेष रूप से सीमा पर हुए *डिसइंगेजमेंट* का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे शांति और स्थिरता का माहौल बना है, जो भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
मोदी ने इस दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा के दोबारा शुरू होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दोनों देशों के लोगों को जोड़ने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की दिशा में अहम निर्णय बताया।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों की पुनः शुरुआत को बड़ा कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे व्यावसायिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क के नए अवसर खुलेंगे। इस सहयोग से न केवल दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों को फायदा होगा, बल्कि यह पूरी मानवता के कल्याण की दिशा में भी योगदान देगा।
मोदी ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत-चीन संबंध आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता की नींव पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने चीन की सफल एससीओ अध्यक्षता पर बधाई दी और आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी सात वर्षों बाद चीन पहुंचे हैं। तियानजिन में आयोजित यह सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा, जिसमें 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासन प्रमुख भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी तय है।