बसपा सुप्रीमो मायावती ने केन्द्र और राज्य सरकारों लगाया आरोप

लखनऊ । बसपा सुप्रीमो मायावती ने केन्द्र और राज्य सरकारों पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में कमजोर एवं वंचित वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं देने का आरोप लगाते हुये कहा कि संविधान दिवस के मौके पर इन वर्गाें के लोगों से माफी मांगनी चाहिये ।

मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने भारतीय संविधान में देश के कमज़ोर एवं उपेक्षित वर्गों के लोगों को विशेषकर शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण व अन्य और ज़रूरी सुविधाओं का प्राविधान किया है मगर अब तक उसका पूरा लाभ इन वर्गों के लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

एससी/एसटी व ओबीसी वर्गों का ज्यादातर विभागों में आरक्षण का कोटा अधूरा पड़ा है जिसको लेकर पीड़ित लोग आए दिन सड़को पर धरना-प्रदर्शन करते रहते हैं।

इन वर्गाें के लिए प्राइवेट सेक्टर में अभी तक भी आरक्षण देने की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। साथ ही, अभी तक भी केन्द्र व राज्य सरकारें इस मामले में कोई भी कानून बनाने के लिए तैयार नहीं हैं।

उन्होने कहा कि केन्द्र व राज्यों की सरकारें संविधान का पालन नहीं कर रही है, ऐसे में उन्हे संविधान दिवस मनाने का कतई भी नैतिक अधिकार नहीं है, बल्कि ऐसी सरकारों को आज इस मौके पर इन वर्गाें के लोगों से माफी मांगनी चाहिये और अपनी इस कमी को जल्दी ही दूर भी करना चाहिये।

मायावती ने कहा कि इन वर्गों के लोगों को सपा जैसी उन पार्टियों से भी ज़रूर सावधान रहना चाहिये जिसने एससी व एसटी का आरक्षण सम्बन्धी बिल संसद में फाड़ दिया था और बिल को फिर षड़यन्त्र के तहत् पास भी नहीं होने दिया गया।

उन्होने कहा कि देश में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। संविधान में इन सबकी तरक्की व उनके जान-माल की सुरक्षा के लिए भी जो भी कानून बने हैं उनका भी सही से केन्द्र व राज्यों की सरकारों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है।

सभी सरकारें इस ओर भी ज़रूर ध्यान दें। संविधान दिवस के मौके पर आज किसानों के आन्दोलन का भी एक वर्ष पूरा हो गया है। केन्द्र सरकार ने अभी हाल ही में इनके तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया है।

इनको यह कदम बहुत पहले ही उठा लेना चाहिये था तो यह ज्यादा बेहतर होता। लेकिन किसानों की अन्य और भी कई जरूरी मांगें हैं उन्हें भी केन्द्र सरकार को स्वीकार कर लेना चाहिये।

मायावती ने कहा कि आज संविधान दिवस’ के मौके पर केन्द्र व सभी राज्य सरकारें इस बात की गहन समीक्षा करें कि क्या वे संविधान का पूरी ईमानदारी व निष्ठा से सही पालन कर रहीं हैं।

उनकी पार्टी ने आज केन्द्र व राज्यों की सभी पार्टियों की सरकारों के भी इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने का फैसला लिया है।

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