नई दिल्ली, 20 सितंबर। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) अब पारंपरिक कोयला खनन से आगे बढ़कर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत सामग्री और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है। कंपनी ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और खनिज सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बड़े निवेश वाली परियोजनाओं पर काम शुरू किया है।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, कोल इंडिया का बिजनेस डेवलपमेंट पोर्टफोलियो पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें कोयला गैसीकरण एवं रसायन, ताप विद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा व ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिज एवं उन्नत सामग्री तथा लौह अयस्क सहित अन्य खनिज शामिल हैं। कंपनी के पास करीब 69,346 करोड़ रुपये की चार कोयला आधारित रसायन परियोजनाएं हैं। इसके अलावा 2×800 मेगावाट की चंद्रपुर ताप विद्युत विस्तार परियोजना, करीब 550 मेगावाट सौर क्षमता और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं भी पोर्टफोलियो में शामिल हैं।
कोयला गैसीकरण के तहत तालचर फर्टिलाइजर्स, भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स, कोल गैस इंडिया और सीआईएल-बीपीसीएल चंद्रपुर जैसी परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इनका उद्देश्य कोयले से यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और अन्य रसायनों का उत्पादन करना है, जिससे आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सके।
ताप विद्युत क्षेत्र में सीआईएल और दामोदर घाटी निगम झारखंड के चंद्रपुरा में 1600 मेगावाट की अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल परियोजना विकसित कर रहे हैं। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा के तहत कंपनी करीब 550 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित कर चुकी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित चिलवा ताल में 20 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी विकसित की जा रही है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में तेलंगाना और ओडिशा में परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। कंपनी महत्वपूर्ण खनिजों में भी अवसर तलाश रही है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ग्रेफाइट तथा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों से जुड़े अवसरों पर काम किया जा रहा है।
आरएंडडी के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 225 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। पोर्टफोलियो में 20 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें स्मार्ट माइनिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसी तकनीकें शामिल हैं।

