नई दिल्ली, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बनती जा रही है। आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को केवल तनाव या चिंता तक सीमित नहीं माना गया है। इसमें मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। आयुष मंत्रालय भी संतुलित जीवनशैली के साथ योग और पारंपरिक आयुर्वेदिक अभ्यासों को अपनाने पर जोर देता रहा है।
आयुर्वेदिक परंपरा में शिरोधारा को मानसिक सुकून देने वाली प्रक्रिया माना जाता है। इसमें माथे पर लगातार एक पतली धार के रूप में तेल या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ डाला जाता है। इससे व्यक्ति को आराम और शांति महसूस हो सकती है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का उपचार नहीं माना जाना चाहिए और यह प्रक्रिया प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में ही कराई जानी चाहिए।
इसी तरह शिरो अभ्यंग यानी औषधीय तेल से सिर और गर्दन की मालिश भी आयुर्वेद में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे सिर और गर्दन की मांसपेशियों को आराम मिलने के साथ थकान कम करने में मदद मिल सकती है। कई लोगों को इसके बाद मानसिक रूप से हल्का और शांत महसूस होता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान सबसे सरल अभ्यासों में शामिल है। नियमित रूप से कुछ समय शांत बैठकर सांस और विचारों पर ध्यान केंद्रित करने से आत्म-जागरूकता बढ़ाने और तनाव को संभालने में मदद मिल सकती है। वहीं, प्राणायाम में नियंत्रित तरीके से सांस लेने और छोड़ने का अभ्यास किया जाता है। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे अभ्यास मन को शांत करने में सहायक माने जाते हैं।
कपालभाति का अभ्यास हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता, इसलिए इसे किसी प्रशिक्षित विशेषज्ञ से सीखना बेहतर है। योगासन भी शरीर और मन के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकते हैं। इन्हें हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन पारंपरिक उपायों के साथ पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या भी जरूरी है। यदि तनाव, चिंता, नींद की समस्या या अन्य मानसिक परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और योग्य चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।