नई दिल्ली। रेगिस्तान का नाम सुनते ही तेज धूप, तपती रेत और भीषण गर्मी का ख्याल आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही रेगिस्तान रात होते-होते काफी ठंडा हो जाता है? कई रेगिस्तानी इलाकों में दिन और रात के तापमान के बीच 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर दर्ज किया जाता है। इसके पीछे रेत, वातावरण और नमी से जुड़े वैज्ञानिक कारण जिम्मेदार हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिन के समय सूर्य की किरणें सीधे रेगिस्तान की रेत पर पड़ती हैं। रेत की ऊष्मा धारण करने की क्षमता (हीट कैपेसिटी) पानी, मिट्टी और वनस्पति से ढकी जमीन की तुलना में काफी कम होती है। यही वजह है कि रेत बहुत तेजी से गर्म हो जाती है और अपने संपर्क में आने वाली हवा का तापमान भी तेजी से बढ़ा देती है। परिणामस्वरूप दोपहर तक रेगिस्तान में भीषण गर्मी पड़ने लगती है और वहां रहना या चलना मुश्किल हो जाता है।
सूर्यास्त के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। जैसे ही सूर्य की गर्मी समाप्त होती है, रेत अपने भीतर जमा ऊष्मा को तेजी से बाहर छोड़ देती है। चूंकि रेत लंबे समय तक गर्मी को अपने अंदर नहीं रोक पाती, इसलिए जमीन और उसके ऊपर की हवा का तापमान तेजी से गिरने लगता है। यही कारण है कि रात के समय रेगिस्तान का मौसम काफी ठंडा महसूस होता है।
रेगिस्तानी क्षेत्रों में नमी की कमी भी तापमान में इस बड़े बदलाव का अहम कारण है। वातावरण में जलवाष्प बेहद कम होने के कारण पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी वातावरण में नहीं रुकती और सीधे अंतरिक्ष में चली जाती है। इसके अलावा अधिकांश रेगिस्तानों में बादल भी बहुत कम होते हैं। दिन में साफ आसमान के कारण सूर्य की किरणें सीधे धरती तक पहुंचती हैं, जबकि रात में बादलों की अनुपस्थिति के कारण जमीन से निकलने वाली ऊष्मा वापस नहीं लौटती।
वैज्ञानिकों का कहना है कि रेत की कम ऊष्मा धारण क्षमता, वातावरण में नमी की कमी और साफ आसमान मिलकर रेगिस्तान में दिन और रात के तापमान के बीच बड़ा अंतर पैदा करते हैं। सहारा और भारत का थार रेगिस्तान इस प्राकृतिक घटना के प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं।