मुंबई। भारत में उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और बढ़ती सुविधाओं के चलते बोतलबंद एवं पैक्ड शीतल पेय पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है। ताजा उपभोक्ता व्यवहार और बाजार सर्वेक्षण के अनुसार, मार्च से मई 2026 के दौरान देश में बोतलबंद पेय पदार्थों की घरेलू पहुंच (इन-होम पैठ) बढ़कर 44.1 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इस दौरान सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच खपत का अंतर अब लगभग समाप्त हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में शहरी और ग्रामीण इलाकों में बोतलबंद पेय पदार्थों की पहुंच में 9.4 प्रतिशत का अंतर था, लेकिन वर्ष 2026 तक यह घटकर केवल करीब 1.4 से 1.6 प्रतिशत रह गया है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब गांवों में भी पैक्ड पेय पदार्थों की पहुंच और स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि इस अवधि के दौरान बोतलबंद पेय पदार्थों की कुल खपत में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और किफायती पैक (एसकेयू) की उपलब्धता, बेहतर सड़क और परिवहन नेटवर्क, खुदरा दुकानों का तेजी से विस्तार और फ्रिज जैसी कूलिंग सुविधाओं की बढ़ती पहुंच ने इस बदलाव को गति दी है।
पहले जहां पैक्ड पानी, जूस और सॉफ्ट ड्रिंक्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से शहरी इलाकों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब गांवों में भी इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली, सुविधा और आसानी से उपलब्धता के कारण ग्रामीण परिवार भी अब पैक्ड पेय पदार्थों को अपनी दैनिक जरूरतों का हिस्सा बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह साबुन, शैंपू और बिस्कुट जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों ने गांवों में मजबूत बाजार बनाया, उसी तरह अब बोतलबंद पानी, जूस और सॉफ्ट ड्रिंक्स भी ग्रामीण बाजार में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और अधिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।