संसद में पहले ही दिन क्यों मचा बवाल?

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को ही जोरदार हंगामे के साथ हुई। पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में विपक्ष ने नीट-यूजी पेपर लीक, अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नीट-यूजी पेपर लीक का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज दबाई जा रही है और उन पर लाठीचार्ज किया गया। खरगे ने इस पूरे मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। हालांकि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और सभापति ने इसे दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। सांसद नीट-यूजी पेपर लीक, श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए पोस्टर और बैनर लेकर सदन में पहुंचे। सदन के भीतर लगातार नारेबाजी होती रही, जिससे कार्यवाही महज 12 मिनट ही चल पाई। स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार ने इस सत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। इनमें आयकर संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक तथा उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक समेत सात अहम विधेयक शामिल हैं। ऐसे में सत्र के पहले ही दिन का हंगामा यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकती है।

 

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