400 करोड़ खर्च के बाद भी खेत सूखे, आखिर कहां गई रकम?

 देहरादून। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (पीडीएमसी) योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि कृषि एवं उद्यान विभाग के माध्यम से योजना पर 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद कई क्षेत्रों में किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। ड्रिप सिंचाई प्रणालियां कई स्थानों पर अनुपयोगी पड़ी मिलीं। आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी की शिकायत के आधार पर देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।

विकेश नेगी ने आरटीआई के माध्यम से पीएमकेएसवाई और पीडीएमसी योजना से जुड़ी जानकारी मांगी थी। प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने विभिन्न जिलों में योजना के क्रियान्वयन, लाभार्थी सत्यापन, निगरानी और ड्रिप सिस्टम की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को शिकायत भेजी गई है। कई जिलों में मुख्य विकास अधिकारियों को जांच अधिकारी बनाया गया है।

थर्ड पार्टी मूल्यांकन में पौड़ी गढ़वाल में वर्ष 2016-17 और 2017-18 में स्थापित ड्रिप सिंचाई प्रणालियों की स्थिति की जांच की गई। इसमें कुछ स्थानों पर सिस्टम बंद मिलने और कई खेतों में पूरी व्यवस्था के बजाय केवल ड्रिप पाइप के अवशेष पाए जाने की बात सामने आई। कुछ मामलों में सामग्री उपलब्ध कराने के बावजूद विधिवत स्थापना नहीं किए जाने का भी उल्लेख है।

रुद्रप्रयाग में किसानों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ मामलों में सामग्री तो उपलब्ध कराई गई, लेकिन सिस्टम की स्थापना, परीक्षण और संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। पिथौरागढ़ में भी पाइप, फिल्टर और ड्रिपर उपलब्ध कराए जाने, लेकिन स्थापना और प्रशिक्षण की कमी की शिकायत सामने आई।

चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट के अलावा थर्ड पार्टी मूल्यांकन, कैग और आंतरिक ऑडिट से संबंधित आपत्तियों का भी शिकायत में उल्लेख किया गया है। इनमें लाभार्थी सत्यापन, अभिलेखों के रखरखाव, निरीक्षण, निगरानी और शासनादेशों के अनुपालन से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। अब मजिस्ट्रेटी जांच के जरिए यह स्पष्ट होगा कि योजना के तहत खर्च हुई बड़ी धनराशि का वास्तविक लाभ किसानों तक क्यों नहीं पहुंच सका।

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