क्या E20 पेट्रोल जल्दबाजी में लागू हुआ? सरकार ने पहली बार बताई पूरी कहानी

देश में ई-20 पेट्रोल लागू होने के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या भारत ने एथनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को जल्दबाजी में लागू किया है। इन आशंकाओं पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जवाब देते हुए कहा है कि यह कार्यक्रम किसी त्वरित निर्णय का परिणाम नहीं, बल्कि करीब 25 वर्षों की योजनाबद्ध तैयारी और नीति निर्माण का नतीजा है।

मंत्रालय के अनुसार, भारत ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन इसे पांच वर्ष पहले यानी 2025 में ही हासिल कर लिया गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इस दिशा में बिना तैयारी के कदम उठाया गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एथनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। ब्राजील और अमेरिका सहित कई देशों में इसका उपयोग दशकों से किया जा रहा है और हेनरी फोर्ड की शुरुआती कारें भी एथनॉल आधारित ईंधन पर चलती थीं।

भारत में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में एक पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। इसके बाद 2005 में इसकी औपचारिक घोषणा की गई और 2006 से कुछ राज्यों में 5 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति शुरू हुई। वर्ष 2013 में सरकार ने एथनॉल नीति का विस्तृत ढांचा तैयार किया, जबकि 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) लागू कर उत्पादन और उपयोग को नई गति दी गई।

मंत्रालय के मुताबिक, 2021 में नीति आयोग ने एथनॉल ब्लेंडिंग का विस्तृत रोडमैप तैयार किया, जिसमें ऑटोमोबाइल उद्योग, तेल कंपनियां, कृषि विशेषज्ञ और विभिन्न सरकारी विभाग शामिल रहे। वर्तमान में देश में लगभग 400 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 1,200 करोड़ लीटर करने की दिशा में काम चल रहा है।

सरकार का कहना है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण जैसे दीर्घकालिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसलिए इसे जल्दबाजी में लागू किया गया कदम मानना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

 

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