अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर की वित्तीय व्यवस्था चर्चा में है। यहां हर वर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन के लिए पारदर्शी और निर्धारित ट्रस्ट प्रणाली लागू है। ट्रस्ट का दावा है कि दान की गिनती से लेकर बैंक में जमा करने और वार्षिक ऑडिट तक पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक निगरानी में संपन्न होती है।
ओंकारेश्वर मंदिर को वर्ष 1959 में मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1951 के तहत सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित किया गया था। मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी सात सदस्यीय ट्रस्ट के पास है। इसमें मांधाता के राव मैनेजिंग ट्रस्टी होते हैं, जबकि अन्य सदस्यों का चयन विभिन्न प्रशासनिक संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
वर्तमान में राव पुष्पेंद्र सिंह मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ट्रस्ट से जुड़े हैं, जबकि पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अशोक महाजन सहायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि दान की राशि का उपयोग केवल निर्धारित धार्मिक और विकास कार्यों के लिए किया जाता है तथा इसकी नियमित निगरानी और ऑडिट सुनिश्चित किया जाता है।
मंदिर में ऑनलाइन मिलने वाले दान का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। वहीं, ऑफलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को रसीद दी जाती है और जरूरत पड़ने पर आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत प्रमाणपत्र भी जारी किया जाता है।
दानपेटियों में प्राप्त नकदी की गिनती प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में होती है। ट्रस्ट के अनुसार, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है और गिनती पूरी होने के बाद राशि को सीधे बैंक खातों में जमा कराया जाता है। इससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने में मदद मिलती है।
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट का वार्षिक बजट करीब 15 से 20 करोड़ रुपये के बीच है। इस राशि का उपयोग मंदिर के रखरखाव, विकास कार्यों, धार्मिक आयोजनों, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक जरूरतों पर किया जाता है।