भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु आज अपना 31वां जन्मदिन मना रही हैं। भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली सिंधु देश की पहली ऐसी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक में दो व्यक्तिगत पदक जीतकर इतिहास रचा। उनकी उपलब्धियां आज भी करोड़ों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में जन्मी पीवी सिंधु का खेलों से जुड़ाव बचपन से ही रहा। उनके माता-पिता दोनों राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी थे। हालांकि, वर्ष 2001 में कोच पुलेला गोपीचंद की ऐतिहासिक इंग्लैंड ओपन जीत ने सिंधु को बैडमिंटन की ओर आकर्षित किया। इसके बाद महज आठ वर्ष की उम्र में उन्होंने रैकेट थाम लिया और गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया।
अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिंधु ने कठिन अनुशासन का पालन किया। लंबे समय तक उन्होंने मोबाइल फोन से दूरी बनाकर केवल अभ्यास पर ध्यान केंद्रित रखा। उनकी मेहनत का असर जल्द ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दिखाई देने लगा। वर्ष 2011 में उन्होंने मालदीव इंटरनेशनल चैलेंज का खिताब जीता। इसके बाद 2012 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और 2013 में मलेशिया ओपन ग्रां प्री का खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
साल 2016 सिंधु के करियर का सबसे यादगार वर्ष साबित हुआ। उन्होंने पहले चाइना ओपन का खिताब जीता और फिर रियो ओलंपिक 2016 में रजत पदक जीतकर भारतीय बैडमिंटन को नई पहचान दिलाई। इसके बाद 2019 में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतकर वह विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। वहीं, टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने ओलंपिक में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनने का गौरव हासिल किया।
पीवी सिंधु को उनके शानदार योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत से सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाली सिंधु आज भारतीय खेल जगत की सबसे प्रेरणादायक हस्तियों में शुमार हैं।