नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की विशेष फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) [FCNR(B)] जमा योजना भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इस योजना के जरिए देश के बैंक 60 अरब डॉलर से अधिक की अनिवासी भारतीय (एनआरआई) जमा राशि जुटाने की उम्मीद कर रहे हैं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक योजना के तहत अब तक करीब 4 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया जा चुका है, जबकि सबसे अधिक निवेश अगस्त महीने में आने की संभावना जताई जा रही है।
आरबीआई ने इस विशेष योजना की रूपरेखा 8 जून को जारी की थी और बाद में परिचालन संबंधी दिशा-निर्देश भी स्पष्ट किए। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक समेत कई बड़े बैंकों ने इसे तेजी से लागू करना शुरू कर दिया है। बैंक विशेष रूप से उच्च आय वाले एनआरआई निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निवेशकों को नौ गुना तक लीवरेज की सुविधा मिल सकती है, जिससे पांच वर्षों में डॉलर आधारित निवेश पर लगभग 18 से 20 प्रतिशत तक प्रभावी रिटर्न मिलने की संभावना बताई जा रही है। यह योजना 8 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच किए गए नए एफसीएनआर (बी) जमा पर लागू होगी और इसमें हेजिंग की पूरी लागत आरबीआई वहन करेगा।
बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे अधिक निवेश खाड़ी देशों, सिंगापुर और हांगकांग में रहने वाले भारतीयों से आने की संभावना है। दुबई, अबू धाबी और सिंगापुर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहने के कारण वहां इस योजना को अच्छा प्रतिसाद मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप से अपेक्षाकृत कम निवेश आने का अनुमान है, क्योंकि वहां के कई एनआरआई फिलहाल शेयर बाजार में निवेश को अधिक आकर्षक मान रहे हैं।
हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के केंद्रीय बैंक के कुछ नियामकीय प्रावधानों के कारण भारतीय बैंकों को सीमित परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग क्षेत्र को उम्मीद है कि आरबीआई और यूएई के नियामकों के बीच बातचीत से यह मुद्दा जल्द सुलझ जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई के अंत और अगस्त में इस योजना के तहत निवेश गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच सकती हैं।