देहरादून। उत्तराखंड में दालचीनी (सिनामन) की खेती को बढ़ावा देने और इसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गुरुवार को सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का विषय “दालचीनी प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” रखा गया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि दालचीनी पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार उत्तराखंड के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महक कान्ति नीति के अंतर्गत दालचीनी और अन्य सुगंधित फसलों की खेती को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उत्तराखंड की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी।
मंत्री ने कहा कि सेमिनार में श्रीलंका, इंडोनेशिया और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और एरोमा उद्योग से जुड़े उद्यमी भाग ले रहे हैं। उनके अनुभव और तकनीकी ज्ञान का सीधा लाभ राज्य के किसानों को मिलेगा। इससे दालचीनी की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार और बाजार विस्तार में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डे ने बताया कि महक कान्ति नीति के तहत किसानों को सुगंधित और औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य के सुगंधित फसल क्षेत्र का वार्षिक कारोबार 1180 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां दालचीनी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए बेहद अनुकूल हैं। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की ओर भी प्रेरित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह गुसाईं, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की उपाध्यक्ष सोना सजवाण, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव सहित अनेक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और किसान उपस्थित रहे।