कोलकाता। 11 जून से अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की मेजबानी में शुरू होने जा रहे फीफा विश्व कप को लेकर दुनिया भर में उत्साह का माहौल है। भारत में भी फुटबॉल प्रेमी इस महाकुंभ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार विश्व कप में चार भारतीय मूल के खिलाड़ी अलग-अलग देशों की ओर से मैदान में उतर सकते हैं, जिससे भारतीय प्रशंसकों का उत्साह और बढ़ गया है।
विश्व कप में इस बार 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं और करोड़ों भारतीय फुटबॉल प्रेमियों की नजर उन खिलाड़ियों पर भी रहेगी, जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम कतर के युवा विंगर तहसीन जमशीद का है। 19 वर्षीय तहसीन का जन्म दोहा में हुआ, लेकिन उनका परिवार मूल रूप से केरल के कन्नूर जिले से संबंध रखता है। वह कतर की टीम के लिए खेलते हैं और अंतिम टीम में जगह बनाने की मजबूत दावेदारी रखते हैं।
दूसरा नाम न्यूजीलैंड के अटैकिंग मिडफील्डर सरप्रीत सिंह का है। 27 वर्षीय सरप्रीत के परिवार की जड़ें पंजाब के जालंधर से जुड़ी हैं। वह 2018 से न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।
कांगो की ओर से खेलने वाले सैमुअल मुतुसामी भी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की सूची में शामिल हैं। तमिल मूल के सैमुअल एक अनुभवी डिफेंसिव मिडफील्डर हैं और 2019 से कांगो की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम में शामिल निशान वेलुपिल्ले भी भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं। विंगर के रूप में खेलने वाले निशान के परिवार का संबंध तमिलनाडु से माना जाता है। उनकी तेज रफ्तार और आक्रामक खेल शैली उन्हें खास बनाती है।
भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि 2006 के बाद पहली बार विश्व कप में भारतीय मूल के खिलाड़ी खेलते नजर आएंगे। इससे पहले फ्रांस की ओर से विकास धोरासू ने विश्व कप में खेलकर भारतीय समुदाय का गौरव बढ़ाया था। ऐसे में इस बार भी भारतीय फैंस इन चारों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रखेंगे।