उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को ठोस और समयबद्ध कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को जिलाधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने पीएम पोषण (मिड-डे मील) और समग्र शिक्षा अभियान की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया तथा शिक्षा की गुणवत्ता, आधारभूत ढांचे और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार पर विशेष जोर दिया।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के लर्निंग आउटकम में वास्तविक सुधार सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए और नियमित मूल्यांकन के माध्यम से इसकी निगरानी की जाए।
आनंद बर्द्धन ने विद्यालयों में वोकेशनल ट्रेनिंग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि छात्रों को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण को स्कूल स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
मुख्य सचिव ने पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और व्यवस्था की निगरानी के लिए सोशल ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म विकसित किया जाए, ताकि किसी भी स्कूल में भोजन वितरण से संबंधित समस्या की तत्काल जानकारी मिल सके।
उन्होंने निर्देश दिया कि यदि किसी विद्यालय में किसी दिन भोजन नहीं बनता है, तो उसके कारणों की तुरंत जानकारी विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से राज्य स्तर पर संचालित एमडीएम सेल को दी जाए। इसके बाद संबंधित राज्य परियोजना निदेशक, जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को तत्काल अवगत कराकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, नियमित निगरानी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण ही विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की आधारशिला है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।