देहरादून। उत्तराखंड में वर्षवार भर्ती प्रणाली बहाल करने की मांग को लेकर नर्सिंग अधिकारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को यह धरना 98वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस आंदोलन के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे नर्सिंग अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
धरना दे रहे नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया लंबित होने के कारण हजारों प्रशिक्षित नर्सिंग युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है और बेरोजगार अभ्यर्थियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, कई बैच लंबे समय से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि वर्षवार भर्ती प्रणाली लागू की जाती है तो सभी लंबित बैचों को क्रमवार तरीके से समायोजित किया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और योग्य अभ्यर्थियों को समय पर रोजगार का अवसर मिल सकेगा।
नर्सिंग अधिकारियों की मांग है कि सरकार लंबित सभी बैचों को वर्षवार भर्ती प्रणाली के तहत समायोजित करे। साथ ही प्रदेश के अस्पतालों में खाली पड़े नर्सिंग पदों को भी इसी प्रणाली के आधार पर भरा जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिल सके और बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर प्राप्त हो सके।
आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि उत्तराखंड के गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान उनकी जायज मांगों पर चर्चा होगी और सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
धरना स्थल पर नवल पुंडीर, विकास पुंडीर, सरिता जोशी, प्रवेश रावत, स्तुति सती, भास्कर, लता और अखिलेश सहित कई नर्सिंग अभ्यर्थी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से शीघ्र निर्णय लेकर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।