नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में चारे की कमी दूर करने और पशुपालन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने संयुक्त रूप से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए परामर्श जारी किया है। इसके तहत ग्रामीण रोजगार योजना को चारा उत्पादन, पशुधन विकास और डेयरी क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ा जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह पहल विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत लागू होगी। इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सालाना 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। योजना के तहत निर्धारित 375 कार्यों में से 22 कार्यों को विशेष रूप से चारा उत्पादन और पशुधन से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चिह्नित किया गया है।
इन कार्यों में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर चारे की खेती, चारागाहों का विकास, साइलेज इकाइयों, चारा बैंकों और भंडारण केंद्रों का निर्माण शामिल है। इसके अलावा मवेशियों, बकरियों, सूअरों और मुर्गी पालन के लिए आश्रय स्थल, सामुदायिक दूध संग्रह केंद्र, पशु चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र और पशुओं के लिए जलपात्र बनाए जाएंगे। पात्र लाभार्थियों के लिए अजोला टैंक निर्माण को भी योजना में शामिल किया गया है।
परामर्श के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय जरूरतों के आधार पर कार्यक्रम के कुल व्यय का कम से कम पांच प्रतिशत हिस्सा चारा एवं पशुधन विकास से जुड़े कार्यों पर खर्च करने की सलाह दी गई है। इन योजनाओं का निर्धारण ग्राम पंचायत स्तर से होगा। चारा विकास और पशुधन सुविधाओं से जुड़े कार्यों को विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं में शामिल कर ग्रामसभा से मंजूरी ली जाएगी।
पशुधन पर निर्भरता वाले क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। जिन ग्राम पंचायतों में 30 प्रतिशत से अधिक आबादी की आजीविका पशुधन पर आधारित है, वहां जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी।
योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सोशल ऑडिट, साप्ताहिक सार्वजनिक जानकारी और शिकायत निवारण व्यवस्था अनिवार्य होगी। सरकार की इस पहल से छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन परिवारों तथा डेयरी क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है।

