वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की बढ़त के बीच ईरान के साथ जारी संघर्ष को रिपब्लिकन पार्टी की हार की प्रमुख वजह माना जा रहा है। अब ट्रंप के सामने ईरान को लेकर अपनी रणनीति बदलने, बातचीत का रास्ता अपनाने या सैन्य कार्रवाई तेज करने जैसे विकल्प हैं। हालांकि, तीनों ही रास्ते उनके लिए राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सामने फिलहाल तीन प्रमुख विकल्प हैं। पहला, ईरान पर दोबारा सैन्य हमला करना। हालांकि, इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है और तेल एवं गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अमेरिकी जनता की नाराजगी बढ़ने की आशंका है। दूसरा विकल्प ईरान के साथ बातचीत कर समझौता करना है। लेकिन ईरान की ओर से रियायत नहीं मिलने या अधिक शर्तें रखे जाने की स्थिति में ट्रंप के लिए समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
तीसरा विकल्प मौजूदा स्थिति बनाए रखना है। इसके तहत ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी और आर्थिक प्रतिबंध जारी रखकर उस पर दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि, इस रणनीति से किसी ठोस नतीजे तक पहुंचने में कई महीने लग सकते हैं।
इस बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के लिए सीधे तौर पर ईरान युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि युद्ध के कारण पार्टी को नुकसान हुआ है और अब भविष्य की रणनीति पर ईमानदारी से विचार करने की जरूरत है। वेंस ने इजराइल के साथ अमेरिका के संबंधों को भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बताया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने वेंस के विश्लेषण को काफी हद तक सही माना। उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध के कारण गैस की कीमतें बढ़ीं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर वह दोबारा ऐसा फैसला लेंगे। युद्ध खत्म करने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि यह फैसला उनके हाथ में है, लेकिन इसे सही तरीके से अंजाम देना होगा।
बातचीत और सैन्य तैयारी दोनों जारी
रिपोर्ट के मुताबिक, वेंस और ट्रंप के कुछ वरिष्ठ सलाहकार ईरान के साथ समझौते के पक्ष में हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना बड़े सैन्य अभियान की संभावित बहाली के लिए तैयारियां कर रही है। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, कतर के मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का मसौदा तैयार कराने की कोशिश में जुटे हैं, ताकि युद्ध दोबारा शुरू होने से रोका जा सके।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी चुनावी नतीजों को ट्रंप की राजनीतिक हार बताते हुए इसे ईरान की जीत करार दिया है। वहीं, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ अली वाएज ने चेतावनी दी है कि ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति की राजनीतिक कमजोरी को सैन्य कमजोरी नहीं समझना चाहिए और बातचीत का अवसर गंवाना नहीं चाहिए।
चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी राजनीति में भी बदलाव के संकेत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बढ़त मिली है। इससे ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले समय में नीतिगत फैसले लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में ईरान युद्ध का भविष्य अब अमेरिका की घरेलू राजनीति और पश्चिम एशिया के कूटनीतिक घटनाक्रम से भी जुड़ गया है।

