मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराएं किसी भी समाज की पहचान होती हैं। इनका संरक्षण करना और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने अखिल गढ़वाल सभा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ‘कौथिग’ जैसे आयोजन उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों से लोगों को अपनी संस्कृति, लोकपरंपराओं और सामाजिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलता है। साथ ही युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करना सीखती है।
मंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे समाज को अपनी परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का काम भी करते हैं। ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, ताकि उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम में ग्राफिक एरा के संस्थापक कमल घनशाला, अखिल गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना, उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट, गजेंद्र भंडारी, उदय शंकर, वीरेंद्र असवाल, सूर्य प्रसाद भट्ट, अजय जोशी और मोहन सिंह खत्री सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
