नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में 11 करोड़ किसानों की विशिष्ट डिजिटल पहचान (फार्मर आईडी) बनाने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच महीने पहले हासिल कर लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को इसे कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता ‘विकसित भारत-समृद्ध किसान’ के संकल्प को मजबूत करती है।
कृषि मंत्री के अनुसार, 23 अक्टूबर की रात तक देश में 11 करोड़ फार्मर आईडी बनाने का काम पूरा हो गया। इस लक्ष्य को 31 मार्च 2027 तक हासिल किया जाना था, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों से इसे पहले ही पूरा कर लिया गया।
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना होगा आसान
यह उपलब्धि केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के तहत हासिल की गई है। फार्मर आईडी के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण, फसल बीमा और आपदा राहत जैसी सुविधाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और आसान तरीके से उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और सत्यापन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि डिजिटल किसान पहचान से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और बैंक ऋण की प्रक्रिया आसान बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल नुकसान के आकलन और मुआवजा वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद के दौरान वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने और बिचौलियों की भूमिका कम करने में भी यह व्यवस्था उपयोगी होगी।
छह करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचा योजनाओं का लाभ
केंद्र सरकार ने 2 सितंबर 2024 को डिजिटल कृषि मिशन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य किसानों का सत्यापित डिजिटल डेटाबेस तैयार करना और कृषि सेवाओं को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना है। मंत्रालय के मुताबिक, फार्मर आईडी आधारित व्यवस्था से अब तक छह करोड़ से अधिक किसानों तक विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा चुका है।
कृषि मंत्री ने इस सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन, जिला स्तरीय टीमों तथा मैदानी कर्मचारियों को दिया। उन्होंने कहा कि बटाईदार किसानों और वास्तविक जोतदारों को भी निर्धारित नियमों के तहत डिजिटल किसान रजिस्ट्री से जोड़ने के प्रयास जारी हैं, ताकि कोई पात्र किसान सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे।
