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कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, 19 श्रद्धालुओं की मौत की खबर; 11 घायलों को किया रेफर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान शनिवार शाम बड़ा हादसा होने की खबर सामने आई है। महासप्तमी के अवसर पर चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के पूजा पंडाल में अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में 19 श्रद्धालुओं की मौत की सूचना है। बांग्ला समाचार पोर्टल आनंद बाजार पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों में 15 महिलाएं, तीन पुरुष और एक बच्चा शामिल हैं। हालांकि, मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

बारिश से बचने के लिए पंडाल में उमड़ी भीड़

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शनिवार शाम उत्तर और मध्य कोलकाता में मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। बारिश के कारण सड़कों पर जाम लग गया। इससे बचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु चोरबागान के पूजा पंडाल में प्रवेश करने लगे। इसी दौरान अचानक भगदड़ मच गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पंडाल के प्रवेश द्वार के अंदर गोलाकार एलिवेटेड कॉरिडोर बना हुआ है। इसी स्थान पर हादसा होने की बात सामने आई है। घटना के समय पंडाल के भीतर और बाहर हजारों श्रद्धालु मौजूद थे।

40 से 50 लोग अस्पताल पहुंचे

हादसे के बाद घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचाया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, करीब 40 से 50 लोगों को इलाज के लिए लाया गया था। इनमें से 11 घायलों को एसएसकेएम अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। राज्य सरकार ने घायलों की जानकारी लेने के लिए टोल फ्री नंबर 18003455678 भी जारी किया है।

दर्शन बंद, आयोजकों को थाने बुलाया

भगदड़ के बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। श्रद्धालुओं को बाहर निकालने के बाद पंडाल की लाइटें बंद कर दी गईं और दर्शन रोक दिए गए। मुख्यमंत्री ने पूजा आयोजित करने वाले क्लब के पदाधिकारियों को थाने बुलाने के निर्देश दिए हैं।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस और दमकल विभाग की टीम के पहुंचने में देरी का आरोप लगाया है। वहीं, आयोजक विकास दास ने कहा कि फिलहाल समिति का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्य पर है और घायलों को अस्पताल पहुंचाना प्राथमिकता है। हादसे के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

 

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