अपने संबोधन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में पांच वर्ष कैसे बीत गए, इसका पता ही नहीं चला। यहां बिताया गया समय उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और यादगार दौर में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों से मिले स्नेह, आत्मीयता और सहयोग को वह हमेशा याद रखेंगे।
राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेना में लंबे समय तक सेवाएं देने के दौरान लोगों से मिलने-जुलने और संवाद करने के अवसर अपेक्षाकृत सीमित रहते थे। लेकिन राज्यपाल के रूप में उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से खुलकर मिलने, उनकी बातें सुनने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है। यहां के लोगों का व्यवहार, अपनापन और सहयोग उनके लिए हमेशा खास रहेगा। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभवों और विचारों को लगातार लिखने का भी प्रयास किया, जिससे अनेक महत्वपूर्ण सीख और यादें संकलित हो सकीं।
राज्यपाल ने लोक भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी ने टीम भावना, आपसी समन्वय और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने कहा कि लोक भवन परिवार के साथ बिताए गए पल और यहां से जुड़ी स्मृतियां हमेशा उनके हृदय में रहेंगी।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग को अपनी कार्ययात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। विदाई समारोह में मौजूद कर्मचारियों ने भी राज्यपाल के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए और उनसे जुड़ी यादों को ताजा किया।
समारोह में सचिव राज्यपाल रविनाथ राम, अपर सचिव रीना जोशी सहित लोक भवन के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने राज्यपाल के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी। कार्यक्रम का माहौल आत्मीयता और पुरानी स्मृतियों से भरा रहा।
