नियोजन विभाग और देवभूमि डायलॉग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों की सफलता की कहानियां सुनीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तराखंड भी लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के लोगों की मेहनत, प्रतिभा और नवाचार की सोच राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन और ऊर्जा उत्तराखंड के विकास के प्रमुख आधार हैं। इन क्षेत्रों में हुई प्रगति के साथ रोजगार और स्वरोजगार की नई संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने कृषि, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में युवाओं के प्रयोगों को भी महत्वपूर्ण बताया। स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उद्यम स्थापित करने से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
संवाद के दौरान उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने बताया कि उन्होंने एक गाय से डेयरी व्यवसाय शुरू किया था, जो अब पांच बद्री और आठ देशी गायों तक पहुंच गया है। चम्पावत के राहुल नरियाल ने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली कार तैयार करने की जानकारी साझा की। पौड़ी के नवीन पटवाल ने गुच्छी मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन से रोजगार सृजन के प्रयास बताए।
ऊधमसिंह नगर के विकास कुमार शाह ने बताया कि पत्नी के साथ शुरू किया गया उनका स्टार्टअप 10 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी और हर्बल उत्पादों का कारोबार शुरू किया और स्थानीय लोगों को रोजगार दिया। नैनीताल की कमला देवी वाहनों के टायरों की मरम्मत कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
चमोली के डॉ. हरपाल नेगी ने बताया कि घेस क्षेत्र में कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों के उत्पादन से 300 से अधिक लोग जुड़े हैं। इस काम से सामूहिक रूप से सालाना करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की आय अर्जित की जा रही है।
कार्यक्रम में एकीकृत कृषि, पिरूल से उपयोगी उत्पाद, बागवानी, मोटे अनाज की बेकरी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशी शिक्षा से जुड़े लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं और संसाधनों को प्रोत्साहित करना उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए जरूरी है।
