कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि नशा व्यक्ति की सोच, निर्णय लेने की क्षमता और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कई बार युवा तात्कालिक आनंद प्राप्त करने या दूसरों पर प्रभाव जमाने की चाह में नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें अपने फैसलों के प्रति सजग रहने और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा भविष्य को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों को समझाया कि युवावस्था में अपनाई गई आदतें और लिए गए निर्णय जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए युवाओं को क्षणिक सुख और आकर्षण के बजाय अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे से दूरी बनाकर ही युवा अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।
उन्होंने प्रकृति के सिद्धांत ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ यानी योग्यतम की उत्तरजीविता का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। इसके लिए स्वस्थ जीवनशैली, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच अपनाना आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद के माध्यम से उन्हें अपनी जिम्मेदारियों और आदतों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि उसके निर्णयों का असर केवल वर्तमान पर ही नहीं, बल्कि भविष्य पर भी पड़ता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहने का संकल्प लें और अपनी ऊर्जा को शिक्षा, कौशल विकास तथा रचनात्मक गतिविधियों में लगाएं। साथ ही अपने मित्रों और आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ नशामुक्त समाज के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। जागरूकता, सही निर्णय और सकारात्मक जीवनशैली के माध्यम से युवा अपने भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
