अमरनाथ सिंह
बनबसा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में चंपावत जिले के बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी। राज्य गठन के करीब 26 साल बाद पहली बार चंपावत में हुई मंत्रिमंडल की बैठक को सरकार ने क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। बैठक में युवाओं के कौशल विकास, सौर ऊर्जा, भूमि अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन से जुड़े फैसले लिए गए।
इन फैसलों में अगले पांच वर्षों के लिए 200 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना प्रमुख है। इसके तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को एआई, मशीन लर्निंग और अन्य रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार देने, मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में बदलाव और कुक्कुट पालन में सब्सिडी को सीधे बैंक खातों में भेजने जैसे निर्णय भी हुए हैं।
पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए करीब 66.29 करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि मंजूर करने सहित वन भूमि हस्तांतरण के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई बनाने का फैसला भी कैबिनेट में हुआ। सरकार का दावा है कि इन निर्णयों का असर रोजगार, निवेश, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर पड़ेगा। हालांकि, कैबिनेट बैठक के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि कैबिनेट को देहरादून से बाहर आयोजित करने पर हुए खर्च और लिए गए फैसलों का वास्तविक लाभ आम लोगों तक कब पहुंचेगा। कांग्रेस ने बैठक को लेकर खर्च और तत्काल राहत से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
वहीं सरकार और भाजपा का जोर इस बात पर है कि सीमांत क्षेत्र में कैबिनेट बैठक आयोजित कर विकास योजनाओं को प्राथमिकता का संदेश दिया गया है। बैठक से पहले शारदा कॉरिडोर, पूर्णागिरि रोपवे और बाढ़ सुरक्षा जैसे स्थानीय विषयों पर भी अधिकारियों के स्तर पर तैयारियां की गई थीं।
इस लिहाज से बनबसा कैबिनेट के फैसलों का असली मूल्यांकन अब उनके धरातल पर क्रियान्वयन से होगा। घोषणाओं और स्वीकृतियों के बाद योजनाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं और उनका लाभ युवाओं, किसानों, कर्मचारियों तथा सीमांत क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचता है, यही आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल रहेगा।
