कोलकाता। नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने जमानत पर रोक लगाने की मांग करते हुए मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिका को 5 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी।
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष मामला रखा। सरकार का कहना है कि प्रधान 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपित हैं। वहीं, मिलन प्रधान ने संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है, ताकि मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
इससे पहले 29 सितंबर को कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रधान को छह मामलों में अंतरिम जमानत दी थी। अदालत ने उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव में प्रचार करने की अनुमति दी। प्रधान को 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। अदालत के आदेश के तहत उन्हें चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्धारित अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा।
इधर, नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के बीच पुलिस ने कांग्रेस से जुड़े दो नेताओं को हिरासत में लिया। इनमें समाजसेवक माणिक फकीर और मतुआ समुदाय से जुड़े सुकृति रंजन शामिल हैं। दोनों मिलन प्रधान के समर्थन में प्रचार के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें एक गेस्ट हाउस से हिरासत में लिया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से हिरासत का स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया था।
माणिक फकीर ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के जरिए चुनाव प्रचार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मतदाताओं से बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की। सुकृति रंजन ने भी दावा किया कि प्रचार के लिए निकलते ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। ऐसे में मिलन प्रधान की जमानत और नेताओं की हिरासत का मुद्दा चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट में अब 5 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई होगी।