पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले के बालाकोट गांव की कलावती देवी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई हैं। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय खुद के साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करने का संकल्प लिया। उनकी मेहनत और सामूहिक प्रयास से शुरू हुआ डेयरी उद्यम अब ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मददगार बन रहा है।
कलावती देवी की अध्यक्षता में महादेव स्वायत्त संघ बालाकोट ने सामूहिक डेयरी उद्यम की शुरुआत की। यह पहल आईफेड (इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के सहयोग से संचालित ग्रामोत्थान परियोजना के तहत शुरू की गई। परियोजना के अंतर्गत कम्युनिटी बेस्ड ऑर्गेनाइजेशन लेवल एंटरप्राइज के तहत डेयरी गतिविधि के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया।
उद्यम के लिए ग्रामोत्थान परियोजना से छह लाख रुपये की सहायता मिली। इसके अलावा तीन लाख रुपये का बैंक ऋण और एक लाख रुपये की सहभागिता महादेव स्वायत्त संघ की ओर से की गई। इस आर्थिक सहयोग ने ग्रामीण महिलाओं के लिए डेयरी कारोबार को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया।
आज यह सामूहिक डेयरी उद्यम गांव से प्रतिदिन करीब 200 लीटर दूध एकत्र कर बाजार तक पहुंचा रहा है। इससे स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को अपने दूध के लिए बाजार मिल रहा है और ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
दो महिलाओं को मिला रोजगार
डेयरी उद्यम से गांव की दो अन्य महिलाओं को रोजगार भी मिला है। महिलाएं अब अपनी आय के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। कलावती देवी का प्रयास केवल एक डेयरी व्यवसाय खड़ा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व और सामूहिक आर्थिक गतिविधियों की संभावनाओं को भी सामने लाता है।
उनकी कहानी बताती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत कर सकती हैं, बल्कि पूरे गांव की आजीविका को नई दिशा भी दे सकती हैं।