मोदी-शी बैठक के बाद कांग्रेस के 4 सवाल, चीन पर सरकार को घेरा

नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए चीन के प्रति उसकी नीति पर चार सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीन के सामने ‘सुनियोजित आत्मसमर्पण’ की नीति अपना रही है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री की बैठक के बाद देश इन मुद्दों पर जवाब चाहता है। उन्होंने 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद प्रधानमंत्री के बयान का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या उस बयान का असर बाद की भारत-चीन वार्ता में देश की स्थिति पर पड़ा।

कांग्रेस नेता ने पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने दावा किया कि लद्दाख के कुछ हिस्सों में भारत की पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार प्रभावित हुए हैं। साथ ही अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों, स्थानों के नाम बदलने और ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित मेदोग परियोजना को लेकर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

रमेश ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को चीन के कथित समर्थन और इस संबंध में भारत की नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने सैन्य प्रतिष्ठान के आकलन और पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान के बयान में कथित अंतर का जिक्र करते हुए सरकार की रणनीति पर स्पष्टीकरण मांगा।

चौथे सवाल में कांग्रेस ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया। रमेश के अनुसार, 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता को चिंता का विषय बताया।

वहीं, बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने ब्रिक्स सम्मेलन को भारत के लिए ऐतिहासिक सफलता बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण आर्थिक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कांग्रेस पर समिट की उपलब्धियों पर सवाल उठाने के लिए निशाना साधा।

ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, इस निंदा को लेकर राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग रही। बीजेपी नेता रविंदर रैना ने इसे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता बताया, जबकि जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने इसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि मानने से इनकार किया।

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