देहरादून। दून विश्वविद्यालय और मेक्सिको के प्रतिष्ठित सेंटर फॉर रिसर्च एंड एडवांस्ड स्टडीज (सिनवेस्टाव) के बीच अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस करार से दोनों संस्थानों के बीच शोध, शिक्षा और ज्ञान के आदान-प्रदान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.), दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल और विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर डॉ. अरुण कुमार सहित कई अधिकारी, वैज्ञानिक, फैकल्टी सदस्य और शोधकर्ता मौजूद रहे। सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टो सांचेज हर्नांडेज, इंटरनेशनल रिलेशंस कोऑर्डिनेटर प्रो. मार्था एस्पिनोसा और मैक्सिको में भारत की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन दीप्ति गांजी कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े।
वर्ष 1961 में स्थापित सिनवेस्टाव प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और मानविकी के क्षेत्र में उन्नत शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। यह स्वायत्त और केंद्र सरकार से वित्तपोषित सार्वजनिक शोध संस्थान है, जो मेक्सिको में 11 परिसरों के नेटवर्क के माध्यम से काम करता है।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि शिक्षा निरंतर सीखने और नए अनुभव हासिल करने की प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विभिन्न देशों के संस्थानों को एक-दूसरे के अनुभव और विशेषज्ञता से सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय और सिनवेस्टाव के बीच हुआ यह समझौता शोध के विभिन्न आयामों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राज्यपाल ने सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टो सांचेज हर्नांडेज और मैक्सिको स्थित भारतीय दूतावास की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन दीप्ति गांजी के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समझौतों से उत्तराखंड की उच्च शिक्षा और शोध को वैश्विक पहचान मिल सकती है। उन्होंने प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों को भी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
समारोह में दून विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दुर्गेश डिमरी, प्रो. आरपी ममगाईं, प्रो. बीएस बिष्ट, डॉ. हिमानी शर्मा और डॉ. चारू द्विवेदी समेत अन्य अधिकारी और शोधकर्ता उपस्थित रहे।