अहमदाबाद। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महात्मा गांधी के विचारों और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बापू ने धर्मांतरण को पाप का एक रूप माना था। उन्होंने लोगों को अपने स्वधर्म और अंतरात्मा की आवाज के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा दी थी। शाह ने कहा कि वह बहुत कम उम्र से ही महात्मा गांधी के प्रशंसक रहे हैं और उनके विचारों से प्रभावित होकर स्वयं को उनका अनुयायी भी मानते हैं।
अमित शाह शुक्रवार को अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। समारोह में करीब 900 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। उन्होंने विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह उनके जीवन का अनमोल अवसर है, लेकिन उनके लिए भी यह कार्यक्रम बेहद विशेष है।
शाह ने गुजरात विद्यापीठ से अपने पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने बताया कि वह कभी यहां की लाइब्रेरी में नियमित रूप से किताबें पढ़ा करते थे। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि भविष्य में इसी संस्थान के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का अवसर मिलेगा।
खादी से जुड़ी बचपन की यादें साझा कीं
गृह मंत्री ने महात्मा गांधी के प्रति अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बचपन में उन्होंने लंबे समय तक सूत काता और खादी से जुड़ा काम किया। उनकी मां ने उनसे जीवनभर खादी पहनने का संकल्प भी करवाया था। शाह ने विद्यार्थियों से गांधीजी के विचारों और लेखन को पढ़ने तथा उनके मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
सिद्धांतहीन राजनीति को बताया पाप
अमित शाह ने गांधीजी के ‘सात सामाजिक पापों’ और उनकी रचनाओं में बताए गए 11 गुणों का जिक्र करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को इन आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांधीजी के अनुसार सिद्धांतों के बिना राजनीति पाप है। राजनीति स्पष्ट सिद्धांतों और उद्देश्य पर आधारित होनी चाहिए। केवल व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीति करना भी गांधीजी के विचारों के अनुरूप नहीं है।
शाह ने कहा कि गांधीजी ‘नवनिर्माण’ की बजाय ‘पुनर्निर्माण’ शब्द का इस्तेमाल करते थे। उनके अनुसार भारत को गुलामी के दौरान कमजोर और विभाजित किया गया था, इसलिए देश के पुनर्निर्माण की जरूरत थी। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गांधीजी के इसी विचार से प्रेरणा लेते हुए भारत के पुनर्निर्माण की दिशा में काम कर रही है।