मुंबई। महाभारत धारावाहिक में भीष्म पितामह की भूमिका से लोकप्रिय हुए अभिनेता मुकेश खन्ना के एक बयान के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर बहस तेज हो गई है। खन्ना ने मांग की है कि देश के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम्’ को रखा जाना चाहिए। हालांकि, अपने बयान में उन्होंने एक तथ्यात्मक गलती भी कर दी। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत बनाने की बात कही, जबकि भारत में वंदे मातरम् पहले से ही राष्ट्रगीत है।
मुकेश खन्ना ने कहा कि वह कई साल पहले भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने ‘जन गण मन’ को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए दावा किया कि इसे बदलकर ‘वंदे मातरम्’ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश की भावना और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा गीत है।
अभिनेता ने यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को स्कूलों में अधिक प्रमुखता मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे लेकर शुरू किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। खन्ना ने बताया कि वह खुद भी ‘वंदे मातरम्’ पर एक गीत तैयार कर रहे हैं, जिसे आने वाले महीनों में रिलीज करने की योजना है।
इसी बीच केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी नए निर्देश भी चर्चा में हैं। केंद्र ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को पत्र भेजकर कार्यक्रमों में दोनों के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों का पालन करने को कहा है।
निर्देशों के मुताबिक, जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का आयोजन होता है, वहां पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा। जिन राज्यों में राज्य गीत की व्यवस्था है, वहां भी निर्धारित क्रम का पालन करने की बात कही गई है।
बताया गया है कि केंद्र की ओर से यह पत्र 9 जुलाई को राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों को भेजा गया था, जिसकी जानकारी अब सामने आई है। इस बीच मुकेश खन्ना के बयान ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।