नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव शुरू कर दिए हैं। परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने के तहत एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने में अब तक सहयोग कर रहे करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को शामिल करने का फैसला किया है। यह कदम केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की अध्यक्षता में हुई बैठकों के बाद उठाया गया है।
मंत्रालय की ओर से NTA को परीक्षा संचालन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। एजेंसी की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को दी है।
नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्रों की जांच के लिए चार-स्तरीय प्रणाली लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा तक उसकी सुरक्षा और गुणवत्ता की कई स्तरों पर जांच सुनिश्चित करना है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से प्रश्नपत्रों में संभावित खामियों और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।
NTA देश की कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं का आयोजन करती है। इनमें JEE-मेन, NEET-UG, CLAT और UGC-NET जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। इन परीक्षाओं में हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
एजेंसी अगले दो से तीन सप्ताह के भीतर करीब 20 से 25 नए अधिकारियों को अपनी टीम में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा भविष्य में और नियुक्तियों पर भी विचार किया जा रहा है। इससे परीक्षा संचालन और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है।
सुरक्षा के मद्देनजर NTA अपने मौजूदा ओखला कार्यालय को मिंटो रोड स्थित नए परिसर में स्थानांतरित करने की तैयारी में है। नए परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती भी की जाएगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने NTA को अपनी सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का व्यापक ऑडिट कराने और एक महीने के भीतर उठाए गए कदमों की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाना है।