विदेशी मुद्रा योजना को मिला विस्तार, 52 अरब डॉलर जमा होने के बाद अब 80 अरब का लक्ष्य

देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए शुरू की गई विशेष योजना को केंद्र सरकार ने अब 31 दिसंबर 2026 तक जारी रखने का फैसला किया है। योजना के तहत अब तक बड़ी राशि विदेशी मुद्रा के रूप में जमा हो चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 13 अगस्त तक करीब 52 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा की जा चुकी है।

सरकार ने इस योजना के जरिए कुल 80 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लिहाज से अब तक लक्ष्य का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया जा चुका है। सरकार को निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अब लगभग 28 अरब डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा जुटानी होगी।

योजना की अवधि बढ़ाए जाने से बैंकों और संबंधित वित्तीय संस्थानों को विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। सरकार का प्रयास है कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखा जाए और बैंकिंग व्यवस्था में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता पर्याप्त रहे।

दरअसल, वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और डॉलर की मांग के बीच किसी भी देश के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मजबूत भंडार से आयात के भुगतान, बाहरी देनदारियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े वित्तीय दबावों को संभालने में मदद मिलती है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा की बेहतर उपलब्धता से बाहरी क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने से रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आने वाले महीनों में योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी मुद्रा जमाकर्ताओं और बैंकों की इसमें कितनी रुचि बनी रहती है।

सरकार के सामने अब करीब 28 अरब डॉलर अतिरिक्त जुटाने की चुनौती है। दिसंबर 2026 तक योजना को जारी रखने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि लक्ष्य पूरा होता है तो इससे देश की विदेशी मुद्रा स्थिति और मजबूत हो सकती है तथा बाहरी वित्तीय चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।

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