नई दिल्ली, देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर भारी बारिश के साथ कहर बरपा रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में लगातार बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और नदियों के उफान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ ही घंटों की बारिश के बाद कई इलाकों में सड़कें करीब दो फीट तक पानी में डूब गईं। गोमती नगर, हजरतगंज और जानकीपुरम जैसे प्रमुख इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी रही। कई घरों के बेडरूम और किचन तक बारिश का पानी पहुंच गया। वहीं वाराणसी में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके चलते घाटों के आसपास स्थित 100 से अधिक छोटे मंदिर पानी में डूब गए हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से यूपी और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला पुल भी पानी की चपेट में आ गया। आसपास की कॉलोनियों में भी पानी पहुंचने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में 11 नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं।
उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी बारिश के कारण बाजपुर के पास पहाड़ खिसक गया। भूस्खलन के चलते बद्रीनाथ हाईवे पर यातायात बाधित हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
हिमाचल प्रदेश में भी मानसूनी घटनाएं लगातार नुकसान पहुंचा रही हैं। 30 जून से 15 अगस्त के बीच बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में 183 लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार शाम तक राज्य में 103 सड़कें बंद थीं।
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राजस्थान में भी 10 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। शनिवार को भरतपुर और धौलपुर समेत कई जिलों में करीब एक इंच तक बारिश दर्ज की गई।