नई दिल्ली, देशभर के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संसद में पेश की गई ‘भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता’ रिपोर्ट में कई स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता और साफ-सफाई में लापरवाही सामने आई है।
सीएजी की जांच में देश के सभी रेलवे जोन के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पेयजल का जीवाणु संबंधी परीक्षण तक नहीं कराया गया। इससे यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी पर सवाल उठते हैं।
जांच के दौरान कई प्रमुख स्टेशनों के वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के नमूनों में ई. कोलाई की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई गई है। वर्ष 2022-23 में आठ रेलवे जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से लिए गए पानी के नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले। इन नमूनों में ई. कोलाई की मौजूदगी भी दर्ज की गई।
सीएजी ने रेलवे मंत्रालय द्वारा यात्रियों की सुविधाओं के लिए निर्धारित मानकों के पालन में कमी की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता के साथ-साथ शौचालयों की अस्वच्छ स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। अब रेलवे के सामने नियमित जल परीक्षण, स्वच्छता व्यवस्था में सुधार और निर्धारित मानकों के प्रभावी पालन की चुनौती है।