भारत में निजी कंपनी का बड़ा कमाल, लॉन्च हुआ 800 kN का ‘एवरेस्ट’ इंजन

बेंगलुरु   भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि सामने आई है। बेंगलुरु की स्पेस टेक कंपनी एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीस ने 800 किलो न्यूटन क्लास का रॉकेट इंजन ‘एवरेस्ट’ पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह भारत की किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित पहला हाई-थ्रस्ट फुल फ्लो स्टेज कंबस्चन (FFSC) इंजन है। इसे खासतौर पर भविष्य के रीयूजेबल रॉकेटों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

‘एवरेस्ट’ इंजन में लिक्विड ऑक्सीजन और मीथेन को प्रणोदक के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इसकी सबसे अहम तकनीकी खूबी फुल फ्लो स्टेज कंबस्चन तकनीक है। इस तकनीक में ईंधन और ऑक्सीडाइजर को पूरी तरह गैस में बदलकर कंबस्चन चैंबर तक पहुंचाया जाता है। इससे इंजन की दक्षता बढ़ाने और संचालन के दौरान तापमान को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

कंपनी के अनुसार, इंजन को 50 से 110 प्रतिशत तक थ्रॉटल करने की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है। यानी उड़ान के अलग-अलग चरणों में रॉकेट की शक्ति को जरूरत के मुताबिक नियंत्रित किया जा सकेगा। यह क्षमता विशेष रूप से रीयूजेबल रॉकेट की लैंडिंग जैसे महत्वपूर्ण चरणों में उपयोगी साबित हो सकती है।

एस्ट्रोबेस के सीईओ नीरज खंडेलवाल ने कहा कि कंपनी उन चुनिंदा वाणिज्यिक कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने इस स्तर के एफएफएससी इंजन को डिजाइन, विकसित और एकीकृत किया है। कंपनी का दावा है कि ‘एवरेस्ट’ का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है।

कंपनी ने दिसंबर 2028 तक ‘एवरेस्ट’ इंजन से लैस मीडियम-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल की पहली ऑर्बिटल उड़ान का लक्ष्य रखा है। हालांकि, अभी इंजन विकास के शुरुआती चरण में है और इसका महत्वपूर्ण हॉट-फायर टेस्ट होना बाकी है। इसके बाद थ्रस्ट, तापमान नियंत्रण, विश्वसनीयता और थ्रॉटलिंग क्षमता की जांच की जाएगी।

कंपनी की दीर्घकालिक योजना सालाना 100 टन पेलोड कक्षा में पहुंचाने की क्षमता विकसित करने और आगे इसे 1,000 टन से अधिक तक बढ़ाने की है। परीक्षण सफल रहे तो ‘एवरेस्ट’ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन सकता है।

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