देहरादून। उत्तराखंड को अंग-विच्छेदन मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में सरकार ने जागरूकता और आधुनिक उपचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में आयोजित Uttarakhand Vascular Summit 2026 के तहत “पुनः जीवन” थीम पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने देशभर से पहुंचे चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ संवहनी रोगों के उपचार तथा अंग-विच्छेदन की रोकथाम से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
सुबोध उनियाल ने कहा कि “कदम सलामत, कल सलामत” केवल एक नारा नहीं है, बल्कि संवहनी रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करने और बीमारी की समय पर पहचान एवं उपचार के लिए प्रेरित करने का संदेश है। उन्होंने कहा कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता चल जाए और मरीज को उचित उपचार मिल जाए तो अंग-विच्छेदन जैसी स्थिति को टाला जा सकता है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। इसके लिए चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि संवहनी रोगों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान बेहद जरूरी है। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समय पर इलाज के बेहतर समन्वय से मरीजों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड को अंग-विच्छेदन मुक्त प्रदेश बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार, चिकित्सकों और स्वास्थ्य संस्थानों की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ऐसे चिकित्सा सम्मेलन विशेषज्ञों को अपने अनुभव और नई तकनीकों को साझा करने का अवसर देते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि Uttarakhand Vascular Summit जैसे आयोजन प्रदेश में संवहनी रोगों के बेहतर उपचार, चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और स्वास्थ्य जागरूकता को नई दिशा देंगे। साथ ही समय पर उपचार की संस्कृति विकसित होने से गंभीर मामलों में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।